Saturday, March 25, 2017

अंतिम फूल



चलते हुए, बाबस्ता
किसी को गैर न कर
कब कहाँ, फलूदे
मेरे इश्क के
तेरे मुँह में
मिठास घोल जायेंगे

मसल मत
इन बहारों को
अपनी खामियों से ;
न जाने कब
पत्थर भी शान से
मस्तक उठा लेते हैं

जिद्दो जहद मत कर
जीवन की इस सफर में;
लम्हे भी करवट बदलती है
वक़्त की फरमाईश पर
अंतिम फूल खिलाती है
यह, तेरी मज़ार पर

Monday, March 6, 2017

मेरी रेलगाड़ी



कितना ममत्व लिए
यह चलती है
एक-दो नहीं, बारह-चौबीस बच्चों के साथ;
आवाज़  देती, पुचकारती
रुक रुक कर  खाना खिलाती
पोषित करती, मेरी
यह रेलगाड़ी

नज़र में गंतव्य लिए
पटरियों के सहारे से हल करती
अथक  दौड़ती
पानी या बरसात; बरसाती पहन
बच्चों  को ठण्ड और ज़ुकाम से  बचाती
गर्मी से राहत देती, लिमका पिलाती है
पैंट्री से गरमा-गरम, और
गलियों में धुन बजाती, मेरी
यह रेलगाड़ी

कितना ममत्व लिए
यह चलती है
परिवार से मिलती
आँसू पोछती
बिछरे पल को
अजनबियों से मिलती
किलकारियों की ओट में सहज भाव लेती
दुःख सुख को सहृदय से लगाती,
यह चलती है, चलती ही रहती है

ममत्व की पहचान है
एक अदृश्य को दृष्टि देती
वर्तमान को भविष्य से मिलाती
हज़ार बाहें फैलाये
बच्चों को बहलाती है
ममता की इन्द्रधनुषी रंग में
परिवार को संजोती है,
यही वो है, यही  वो है

Thursday, March 2, 2017

मधुर मुस्कान



कभी उनसे
ये न कहना, कि
मैंने चाह को बर्बाद किया था
वो वैसे ही थी, जैसा
मैंने पहले
उसे पाया था
तक़ाज़ा सिर्फ 'मैं ' का था
जिसके इर्द गिर्द मैं घुमता रहा;
वरना, क्यों
जीवन भर
उसकी मधुर मुस्कान
मुझे सालती रही 

AN ECHO


What nought
I gain
Pumping bristles in a hay

Miles of moorland
Growing
Uncultivated land

Body fray
Loose threads
Wrinkled by an age

What astrolabe
Gain
In celestial nought

Miles of darkness
Deeper
Than the black hole

Thought rumble
Denting spaces
By an echo

Wednesday, March 1, 2017

Fatiha (Ritual prayer for the dead)



Keep slow the pace
O my wandering legs
Patiently; as I
March my grave

Patietly you keep vigil
Looking at me
Your laurels
Twikling stars

My dying song, play
Me a whisper
along the cemetary
Drying leaves rustling

Bother me not by your hush
Half dead
I energize
To enliven my soul

silently
I lie reading Fatiha
To myself.
What repose accrue
Will gather along the cosmic whirl

COATING OF LOVE



How sweet it would be
if brain turns to molasses
and, yummy our thoughts

How sweetly
Marching ants will inflow
Sweetness into our veins

How rue will
Take a puff
Banishing the last regret

How tender your imagery
Padding lovely dreams
In a sweet little bowl

How sweetly
Supper will relish
The coating of love

PLAY SOFTLY



Whence you come
Piping thy melody
Taking nature
In a gush

Never was swaying
more visible, than
When you played softly
Crooning my ears

Who plays mouthful
Gleaming my eyes
Were you not there, inside
Before I treaded you everywhere